Rankawat Samaj

 

Rankawat Swami Samaj     


                               

रांकावत समाज में विभिन् स्तरों पर सांस्कृतिक विविधता दिखाई पड़ती है। समाज की संस्कृति राज्यवार एक-दूसरे से पर्याप्त भिन् हैं। रांकावत स्वामी समाज में लोगों का खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा, सोचने का तरीका, अभिवृत्तियां, नृत्य, संगीत और अन्य कलाएं अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह की हैं। लेकिन समाज में विश्वास, सहयोग और सोच एक ही है। रांकावत समाज की एकता ही समाज की नींव है। और इसी मजबूत नींव के सहारे ही रांकावत समाज का निरंतर विकास जारी है।

 

वर्तमान रांकावत समाज आज भी परम्परागत समाज है, और अब इसे आधुनिक समाज के रूप में देखा जाने लगा है। विभिन्न नियोजित उपायों से आधुनिक समाज में आए व्यवस्था परिवर्तन अपनाए गए उपायों के परिणामों के सकारत्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों को उजागर करते हैं। रांकावत स्वामी समाज के समस्त प्रकरणों के मूल्यांकन के लिए आवश्यक है कि समाज को वर्तमान व उदीयमान समाजों के साथ प्रस्तुत किया जाये। रांकावत स्वामी समाज का विकास भारतीय सामाजिक व्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण पक्षों का विश्लेषण एवं पुनरीक्षण समकालीन भिन्नताओं, उदीयमान तत्वों और भावी परिप्रेक्ष्य के रूप में ही हो रहा है।

 

रांकावत समाज बंधु शारीरिक मानसिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक रूप से संपन्न है।  रांकावत बंधू धार्मिक है, ज्ञानी है,  सुस्वभावी है, धनवान है, दानी है, ईमादार है, होशियार है, बुद्धिमान है, शिक्षित है, मेहनती है, चारित्रसम्पन्न है, मिलनसार है इसी कारण गौरवशाली समाज की अपनी एक विशेष पहचान है। रांकावत समाजबंधुओं में अपने देश, धर्म, जाती, समाज के प्रति गर्व की अनुभूति को जागृत रखी हुई है। अपनी संस्कृति को समाजबंधुओं के जीवनशैली का एक अंग बनाकर अपनी संस्कृति का संरक्षण-संवर्धन कर रहे है। समाज की एकता के लिए यही सबसे पहली जरुरत है। हमें अपने रांकावत होने का गर्व है। अस्मिता और संस्कृति का यही मजबूत धागा समाज को एकता के सूत्र में बांधे रखता है। जिससे समाज में एकता बानी रहती है और समाज संगठित रहता है। रांकावत समाज के विकास के लिए समाज के प्रतिष्ठित लोगों के साथ - साथ हर वर्ग का सहयोग भी पूर्ण रूप से महत्वपूर्ण है।

 

रांकावत समाज की अपनी संस्कृति है, दिनचर्या है, जीवनशैली है। हर समाज का एक विशेष नाम होता है जैसे - रांकावत, राजपूत, माहेश्वरी, जैन आदि। तो उस समाज की अपनी संस्कृति भी होती ही है। समाज की संस्कृति, कायदे-कानून, ऐसी समान बातों या चीजों के जो की उस समाज के सभी लोग एकसमान रूप से करते है। समाज निर्माण ही होता। जब रांकावत समाज की उत्पत्ति हुई थी, उस समय रांकावत समाज के धार्मिक-आध्यात्मिक-सामाजिक प्रबंधन हेतु समाज के नियम भी बने थे । समाज को दिशा देने का, मार्गदर्शन करने का कार्य एक व्यवस्था के रूप में समाज-गुरुओं को सौपा गया था । तत्थ्य बताते है की गुरुओं ने एक सुव्यवस्थित प्रणाली, एक व्यवस्था का निर्माण किया था जो रांकावत उत्पत्ति के बाद वर्षों तक सुचारू रूप से चला और चल रहा है।

रांकावत समाज को संगठित करने में समाज की महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है।

 

रांकावत स्वामी समाज के गौरव को बढ़ने, समाज बंधुओं को आपस में जोड़ने, रांकावत स्वामी समाज के संगठनों से लाइव जोड़ने, समाज के भवन, धर्मशाला, मंदिर जानकारी,   के लिए  Rankawatsamaj.com कृतसंकल्प है, संकल्पबद्ध है । रांकावत समाज के गोत्रों को ऑनलाइन एकत्र करने का प्रयास किया गया है। रांकावत समाज में शादी करने लायक लड़के लड़कियों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

 

 

 

रांकावत समाज की प्रगति के लिए सबसे जरूरी चीज क्या है?

 


 

1.  हर समाज का सविंधान होता है, नियम-कायदे होते है। रांकावत समाज की प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि समाज के व्यक्ति समाज के कायदों का पालन करें।

 

2.  समय के साथ सामाजिक नियम में भी बदलाव होता है। इन बदलाव से समाज मे सुधार होता है, विकास  में गति मिलती है, समाज आधुनिकता की और अग्रसर होता है। लेकिन इस बदलाव से सामाजिक रीती-रिवाज, संस्कृति पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। समाज के सम्माननीय  सदस्यों, संगठनों आदि को नियम मेंं बदलाव का अधिकार एवं समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। 

 

3.  समाज की प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि बनाए गए नियमों का समयानुसार परिमार्जन और परिवर्धन होता रहे। "परंम्परा के नाम पर पुरानी व्यवस्थाएं समाज को पीछे धकेल देगी" यह सोच सही नहीं है बल्कि पुरानी व्यवस्थाओं को जानो-पहचानों की वो आज के संदर्भ में वो कितनी तार्किक है।

 

4.  धर्म, समाज और व्यक्ति तीनो एक दूसरे के पूरक होते है। लंबे समय तक प्रगति को कायम रखने के लिए व्यक्ति को समाज में रहकर धर्म का पालन करना चाहिए। कुरीतियों को समाज का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।

 

5.  हर व्यक्ति को ‘जीओ और जीने दो के सिद्धांत का आदर और पालन करना चाहिए साथ ही समाज के रीती-रिवाज, संस्कृति को भावी पीढ़ी को भी प्रेषित करना भी बहुत जरुरी है।

 

रांकावत समाज की वेबसाइट सार्वजनिक नीति वकालत के लिए अपनी गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा समर्पित कर रही है जिसमें सामाजिक सदस्यों के साथ नीतिगत मुद्दों की पहचान करना, विचारों का मूल्यांकन करना और सार्वजनिक नीतियों को डिजाइन करने में हितधारकों की मदद करना शामिल है। यह रांकावत स्वामी समाज की तेजी से उभरती हुई वेबसाइटों में से एक है, जहां सार्वजनिक नीति और शासन के साथ अनुसंधान और नीति मिलेंगे, एक समर्पित सामाजिक कार्यक्षेत्र होंगे, और यह रांकावत वेबसाइट समाज बंधुओं का सरकार, नागरिक समाज, उद्योगों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग करेगी।

 

वेबसाइट का उद्देश्य रांकावत समाज की समृद्ध संस्कृति और विरासत का प्रचार करना है।