Organization of Rankawat Society

 

Organization of Rankawat Swami Samaj

 Committee, Institute, Organization, Association, charity

 

देश भर में रांकावत स्वामी समाज के अनेक संगठन बने हुए है। समाज के संगठन के अनेक महत्वपूर्ण कार्य होता है की समाजबंधुओं में अपने धर्म या जाती के प्रति एक अस्मिता को, स्व-अस्मिता को, गर्व की अनुभूति को जागृत रखें। रांकावत संस्कृति को समाजबंधुओं के जीवनशैली का एक अंग बनाकर संस्कृति का संरक्षण-संवर्धन करें । समाज की एकता के लिए इसकी जरुरत है।  अस्मिता और संस्कृति का यही मजबूत धागा जिससे संगठन समाज को एकता के सूत्र में बांधे रखता है। रांकावत समाज के इन्ही संगठनो की वजह से आज रांकावत बंधुओं में अपने "रांकावत" होने के प्रति अस्मिता, गर्व की अनुभूति जागृत है।

 

इन्ही संगठन के माध्यम से ही रांकावत  संस्कृति के आन-बान-शान के लिए, संरक्षण-संवर्धन के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने का साहस समाज बंधुओं में है। समाज के संगठन सक्रिय होने के कारण समाज के युवाओं को अपने "रांकावत" होने पर गर्व अनुभव होता है। समाज के संगठन औपचारिक मात्र नहीं है बल्कि संगठन का समाज पर पूरा प्रभाव रहता है, और इसी कारण समाज में एकता बनी हुई है। समाज के लोगों का भी संगठन में पूर्ण विश्वास और लगाव रहता है। इसी कारण समाज और संगठन एक दूसरे की पूरक है। 

 

रांकावत समाज के सभी संगठन समाज में पूर्ण रूप से सक्रिय है। संगठन के द्वारा सामाजिक गतिविधियां चलती रहती है जिससे समाजबंधुओं खासकर युवा 'रांकावत संस्कृति' के बारे में जानकारी रखते है, या कुछ बंधू समाज और समाज की संस्कृति  के बारे में जानना भी चाहते है तो वे संगठन से जुड़ सकते है। रांकावत समाज में संगठन/संस्था का उद्देश्य नई पीढ़ी में सामाजिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना और अन्य समुदायों को हमारी संस्कृति और समृद्ध विरासत से अवगत करना और विकसित करना है।

 

रांकावत समाज मे संगठन मुख्य रूप से समाज की प्रगति के लिए काम करते है।   समाजबंधुओं के आर्थिक प्रगति के लिए संगठन सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे है । इस कार्य हेतु उचित मार्गदर्शन समय-समय पर करते रहते है साथ ही जहाँ आवश्यक हो वहां हर तरह से सहयोग भी करते है। केवल इतना ही नहीं बल्कि समाजबंधुओं के आर्थिक हितों की रक्षा करने का, समाजबंधुओं को एवं माता-बहनों को सामाजिक सुरक्षा देने का कार्य भी समाज के संगठन को करना होता है ।

 

इसी कारण समाजबंधुओं को संगठन की जरुरत है, और संगठन भी समाज के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है और इसीलिए समाज के लोग संगठन से जुड़ते है । तब ही समाजबंधु या समाज, रांकावत समाज के संगठनों का अनुसरण करते है । संगठन के सदस्यों को, नेतृत्व को, पदाधिकारियों को सही मायने में सम्मान मिलता है, समाज पर उनका अधिकार चलता है वो समाज को नई दिशा देते है। इसीलिए समाज उनका अधिकार स्वीकार करता है । आज देशभर में, शहर, तहसील, जिला स्तर से लेकर राष्ट्रिय स्तर तक संगठन और पदाधिकारी बने हुए है । संगठन के जो  सदस्य, पदाधिकारी पद ग्रहण करते है।  वे समाजकार्य करने के महान भावना के साथ संगठन से जुड़ते है, जिम्मेदारियों को उठाने के लिए पदाधिकारी बनते है। वे ऐसे संगठन का निर्माण करते है जो समाज के लिए कई परिणामकारक कार्य करते है।

 

शहर, प्रदेश से लेकर देश स्तर पर संगठन और पदाधिकारी बने हुए है।  सामाजिक कार्य करने के लिए संगठनों में एक समुचित व्यवस्था बनी हुई है। रांकावत समाज के संगठनों में और अधिक विकसित और आधुनिक व्यवस्था का निर्माण किया जाये जिसमें पदाधिकारी और संगठन समाजबंधुओं के लिए और अधिक महत्वपूर्ण  काम आ सके। समाजबंधुओं के विकास में, उन्नत्ति में अपना योगदान दे सकें।

 

देशभर में रांकावत समाज के लिए कार्य करने वाले अनेक संगठन हर स्तर पर बने हुए है, इन सभी संगठनों को एक मंच पर लाया जा सके, सभी में एक बेहतर समन्वय, संपर्क और संवाद स्थापित हो जिससे  समाजहित के कार्य और अधिक व्यापक एवं परिणामकारक बनाये जा सकें। इसमें rankawatsamaj.com अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए अग्रसर है।



 

 

Organization Objectives in Rankawat Society


 

रांकावत समाज में संगठन/संस्था का उद्देश्य नई पीढ़ी में सामाजिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना और अन्य समुदायों को संस्कृति और हमारी समृद्ध विरासत को उजागर करना और विकसित करना है। रांकावत समाज को संगठित कर उन्हें एक मंच प्रदान करने और शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से संगठन का गठन किया जाता है। संगठन अपने लक्ष्य को लेकर लगातार सक्रिय रहते है और बड़े आयोजनों के माध्यम से समाज को एकजुट कर रहा है। राष्ट्रीय, धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में समाज के लोगों की भागीदारी भी पहले से अब ज्यादा बढ़ रही है।

 

"रांकावत समाज में संगठन बुराइयों से लड़ते हुए एक साफ़ सुथरे समाज के निर्माण का सपना सार्थक करने के प्रयास में लगा हुआ हैं। इसी लक्ष्य को लेकर समाज के प्रति उनके दायित्वों का बोध कराने के काम में लगातार प्रयासरत हैं। समाज के संगठनों का उद्देश्य कमजोर व बेसहारा लोगों की समस्याओं को किसी भी तरह से हल करके उनकी मदद करना है। सक्षम व्यक्तियों को सक्रीय करके समाज के विकास में भागीदार बनाना है। संगठन का मकसद होना चाहिए की समाज में राष्टीय स्तर से लेकर शहर तक सामाजिक विकास के कार्य करें जो समाज में व्याप्त सामाजिक बुराइयों से,  भ्रष्टाचार  और अन्याय के खिलाफ बिना किसी दबाब में आये, समाज में आम आदमी की लड़ाई लड़ सके।

 

अगर हम समाज को एक विकसित समाज के रूप में देखना चाहते हैं तो समाज के संगठनों का साथ देना होगा और उनके कार्यों में सहयोग करना होगा। समाज के संगठनों का उद्देश्य कमजोर व बेसहारा लोगों की समस्याओं को किसी भी तरह से हल करके उनकी मदद करना है। सक्षम व्यक्तियों को सक्रीय करके समाज के विकास में भागीदार बनाना है।  

 

 

 

Organization Objectives

 

 

सामाजिक एकता एवं भाईचारे को मजबूती प्रदान करना।


समाज में साक्षरता को बढ़ावा देना और सामाजिक संस्कृति को बनाये रखना।


गरीबों, अपाहिजों आदि को सरकारी सुविधाओं की जानकारी देना।


समाज में स्थापित कुरीतियों एवं बुराइयों को दूर करना।


समाज में बढ़ रहे जातीय एवं साम्प्रदायिक संघर्षों को दूर करना।


संगठन के कार्यों को संचालित करने हेतु विभिन्न प्रान्तों, जिलों, तहसीलों एवं गांवों में आवश्कतानुसार संगठन के शाखा कार्यालयों को स्थापित करके संचालित करना तथा कार्यालयों में एवं देश स्तर पर प्रचार-प्रसार हेतु अस्थायी एवं स्थायी कार्यकर्ताओं की  नियुक्ति करना।


संगठन के समाज कल्याणकारी कार्यों को देश स्तर पर संचालित करने हेतु प्रान्तीय, जिलास्तरीय, तहसील स्तरीय एवं ब्लॉक तथा ग्रामस्तरीय संगठन के शाखा पदाधिकारियों की नियुक्ति करना।
अपने समाज कल्याणकारी कार्यों हेतु प्रशासनिक आर्थिक सहयोग, सब्सिडी एवं सांसद या विधायक निधि से सहयोग प्राप्त करना और आवश्यकतानुसार बैंकों या प्राइवेट वित्तीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त करके कार्यों को संचालित करना।


गरीब बच्चों हेतु शिक्षा की व्यवस्था कराना या आर्थिक मदद देना व होनहार बच्चों को शिक्षा क्षेत्र में पुरस्कृत करना।


संगठन अपने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु उपहार, सहयोग, दान, सम्पत्ति (चल व अचल) संगठन के हित में स्वीकार करने के लिये अधिकृत है।


समाज कल्याणकारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक आदि जनकारियों से जुड़े साहित्य प्रचार सामग्री का प्रकाशन करके आमजन तक पहुँचाना।

 

 

Rankawat Samaj Gotra